भारत में धर्मान्तरण गैंग की प्रमुख है सोनिया गांधी, धर्मान्तरण की देखरेख स्वयं करती थी

सोनिया गाँधी मध्यप्रदेश के झाबुआ में धर्मपरिवर्तन में शामिल सभी ईसाई मिशनरियों के प्रमुखों से कुछ अन्तराल के बाद मिलती रहती थी ..और उन्हें प्रोत्साहित करती थी ..

जब मध्य प्रदेश का बंटवारा नहीं हुआ था, तो झाबुआ ही मध्यप्रदेश में इसे मिशनरियों का मुख्यालय था, जहाँ से पुरे मध्य प्रदेश में मिशनरियों के लोग एक रैकेट की तरह धर्मान्तरण का कार्य किया करते थे, ये संगठित और बिलकुल प्राइवेट लिमिटेड कंपनी की तरह काम करते थे जो जितना अधिक आदिवासियों और दलितों का धर्मान्तरण करेगा उसे उतना अधिक कमिशन और इंसेंटिव सोनिया गाँधी दिग्विजय सिंह को इसलिए लम्बे समय तक एमपी का सीएम बनाये रखा … दिग्विजय सिंह 10 साल तक मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री थे, और ईसाइयत को अपना चुके थे

फिर जब छत्तीसगढ़ बना तो सोनिया ने ईसाई मिशनरियों के दबाव में ही आदिवासी से ईसाई बने अजीत जोगी को सीएम बनाया था …अजीत जोगी अब सरगुजा के जिलाधिकारी थे,तब उनके उपर आदिवासीयो का जबरन धर्मपरिवर्तन के आरोप लगे और न्यायीक जांच में आरोप साबित होने पर अजीत जोगी को जिलाधिकारी ही नही बल्कि आईएएस सेवा से भी इस्तीफा देना पड़ा था …

बाद में उनसे खुश होकर सोनिया गाँधी ने उन्हें कांग्रेस में शामिल किया और छत्तीसगढ़ में कांग्रेस के बहुमत में आते ही विधाचरण शुक्ल और श्यामाचरण शुक्ल जैसे वरिष्ठ नेताओ को लात मारते हुए सोनिया ने अजीत जोगी को सीएम बनाया क्योकि ईसाई मिशनरीज ने सोनिया के उपर दबाव बनाया था

सोनिया गाँधी 2004 से 2014 के बीच उत्तर प्रदेश में भी रायबरेली को छाबुआ की तरह इस्तेमाल कर रही थी

रायबरेली में भी इसे मिशनरियों का मुख्यालय बन गया था, और सोनिया गाँधी इन मिशनरी के लोगों से स्वयं मिला करती थी

भारत के 10 करोड़ आदिवासियों को इसे बनाने का सोनिया गाँधी को रोम द्वारा टारगेट मिला था, जिसपर सोनिया गाँधी जोरशोर से काम कर रही थी

केवल मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ के इलाके में ही 2001 तक 30 लाख आदिवासियों का धर्मान्तरण किया जा चूका था

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